‘वी सैगिटे’ तारा प्रणाली से निकलेगा हजारों सूर्यों जितना तेज विस्फोट, दिन में भी दिखाई देगा
नवीनतम शोध से पता चला है कि लंबे समय तक रहस्यमयी बनी रहने वाली वी सैगिटे नामक द्वितीय तारा प्रणाली जल्द ही अत्यंत तेजस्वी विस्फोट की घटना का केंद्र बन सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह तारामंडल पृथ्वी से लगभग 10,000 प्रकाश-वर्ष दूर धनु (Sagitta) तारामंडल में स्थित है। इसकी खासियत है कि इसमें एक श्वेत बौना तारा है — जो मूलतः सूर्य जैसा तारा अपने जीवन काल के अंत में बनता है — और इसका एक भारी साथी तारा है। अनुवर्ती अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि इस श्वेत बौने तारे द्वारा साथी तारे से पदार्थ ग्रहण करने की दर अब तक देखी गई किसी भी दर से अधिक है।
वी सैगिटे के श्वेत बौने तारे का यह तेज ‘भूख’ उसके साथी तारे को दिन-प्रतिदिन कमजोर कर रही है। शोध टीम के अनुसार यह दोनों तारे केवल 12.3 घंटे के अंतराल पर एक-दूसरे की परिक्रमा करते हैं और हर चक्कर के साथ एक-दूसरे के और भी निकट आ रहे हैं।
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अंतरराष्ट्रीय खगोलशास्त्री अब इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि यह विनाशकारी नृत्य अंततः तारों के आपसी टकराव पर समाप्त होगा। उनकी गणना के अनुसार, अगले लगभग सौ वर्षों के भीतर दोनों तारें आपस में टकराकर एक सुपरनोवा विस्फोट उत्पन्न करेंगी, जिसकी चमक दिन के उजाले में भी पृथ्वी से नंगी आँखों को दिखाई देगी।
शोध के प्रमुख निष्कर्ष
- असाधारण तेज़ी से पदार्थ ग्रहण: वी सैगिटे के श्वेत बौने तारे द्वारा इसकी साथी तारे से पदार्थ अब तक की सबसे तेज गति से ग्रहण किया जा रहा है।
- अत्यधिक तेजस्वी प्रकाश: इस अतिभक्षण की वजह से यह तारा असामान्य रूप से तेजस्वी हो गया है; शोध में यह पाया गया है कि आगामी विस्फोट हजारों सूर्यों की शक्ति के बराबर चमकेगा, जिसे दिन-रात पृथ्वी से नंगी आँखों से देखा जा सकेगा।
- सांकेतिक कक्षीय अवधि: दोनों तारे केवल 12.3 घंटे के चक्र में एक-दूसरे का चक्कर लगाते हैं और हर चक्र में ये और भी करीब आ रहे हैं।
- आगामी विस्फोट की भविष्यवाणी: विशेषज्ञों का अनुमान है कि श्वेत बौने तारे पर जमा पदार्थ कुछ वर्षों में नोवा विस्फोट पैदा करेगा, और अंततः दोनों तारे मिलकर दिन में भी चमकने वाला सुपरनोवा विस्फोट कर देंगे।
अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान
नवीनतम अध्ययन में फिनलैंड के टुर्कू विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय टीम ने V Sagittae से आने वाले प्रकाश का विश्लेषण किया। शोध से पता चला कि यह प्रणाली ‘सुपर-सॉफ्ट एक्स-रे स्रोत’ (SSS) है, अर्थात् श्वेत बौने तारे की सतह पर चल रही तीव्र आणविक क्रियाओं के कारण यह लगातार ऊर्जावान एक्स-रे उत्सर्जित कर रहा है। नतीजतन, वी सैगिटे अपने जैसे तारों में सबसे तेजस्वी SSS बन गया है। साथ ही, वैज्ञानिकों ने पाया कि इस प्रणाली के चारों ओर गैस का एक विशाल घेेरा बन चुका है, जो श्वेत बौने तारे द्वारा उत्सर्जित विशाल ऊर्जा का परिणाम है।
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नोवा और सुपरनोवा विस्फोट क्या हैं?
वैज्ञानिकों के अनुसार नोवा विस्फोट तब होता है जब श्वेत बौने तारे द्वारा ग्रहण किया गया अत्यधिक पदार्थ अचानक सतह से विस्फोट की तरह फेंक दिया जाता है। पारंपरिक नोवा विस्फोट सूर्य की तुलना में लाखों गुना तेजस्वी होते हैं। वी सैगिटे में होने वाला नोवा विस्फोट रात के आकाश में प्रकाश के तेज़ी से चमकते हुए दिखेगा, जिससे ऐसा लगेगा मानो आसमान में एक नया तारागुच्छ फूट पड़ा हो।
नोवा विस्फोट
नोवा विस्फोट मूलतः श्वेत बौने और उसके सहवर्ती तारे के बीच होने वाली तीव्र पदार्थ आदान-प्रदान की प्रक्रिया है, जिसमें श्वेत बौना तारा अपनी सतह पर जमा अतिरिक्त पदार्थ को विस्फोट की तरह बाहर निकाल देता है। इस घटना में श्वेत बौने तारे का मुख्य भाग सुरक्षित रह जाता है, लेकिन यह घटक बहुत तेजस्वी प्रकाश उत्सर्जित करता है।
सुपरनोवा विस्फोट
सुपरनोवा विस्फोट उससे भी भयानक घटना है जिसमें दोनों तारे एक साथ आपस में टकरा जाते हैं। वी सैगिटे के मामले में जब दोनों तारे मिलकर टकराएंगे, तो पूरी प्रणाली एक महा-विस्फोट (सुपरनोवा) बन जाएगी। इस विस्फोट की रोशनी सूर्य की तुलना में कई गुना अधिक तेजस्वी होगी; अगर यह पृथ्वी के निकट होती तो दिन के समय भी आकाश को उजियाले से भर सकती थी।
भविष्यवाणियाँ और दृश्यता
वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार वी सैगिटे में आगामी कुछ वर्षों में ही पहला नोवा विस्फोट हो सकता है। इसके बाद का महासंग्राम और भी भयंकर होगा: दोनों तारे अंततः एक साथ टकराकर सुपरनोवा विस्फोट में परिणत हो जाएंगे, जिसकी चमक दिन में भी नंगी आँखों को दिखाई देगी। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह घटना खगोल-दर्शी समुदाय के लिए अनूठा अवसर होगी। अगर अनुमान सही रहे, तो आने वाली पीढ़ियाँ इस अद्वितीय खगोलीय तमाशे की साक्षी बनेंगी।
इन निष्कर्षों से स्पष्ट है कि वी सैगिटे प्रणाली आकाशगंगा में एक अत्यंत दुर्लभ और जबरदस्त खगोलीय घटना के लिए तैयार है। यह हमें याद दिलाता है कि ब्रह्मांड की घटनाएँ कितनी आश्चर्यजनक और अप्रत्याशित हो सकती हैं।



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